और मैं इनका भक्त
कहते हैं न
बच्चों में भगवान
ग़ालिब साहब ने
भी कहां है कि
किसी रोते हुए बच्चे को
हँसा दे,यही मंदिर यही मज्जिद
हमारे ये गणेश को हम
ध्यान रखते
इनका रोना नहीं देख सकते
बड़ी बात यह है कि
यह हमें एक पल भी
यादों में दस्तक इ देने देते
जब तक पास है
दादा, दादा, दादा
हमने भी सब कुछ भूल
साथ देना पढ़ता है
मोबाइल छीन लिया
लिख रहे है
ठीक हैं भाई
लेलो
किसकी ताकत
हमारे हाथ से
मोबाइल छीन लेने की
किस की ताकत
हमारे गाल और बाल को
छू लेने की
सिवा हमारे इन गणेश को छोड़
ये है हमारे भगवान जो
हमारी रूह की तरह
साथ होते हैं
हमारी रूह भी
इसी तरह की है
प्रणाम करता हूं
इन गणेश को जो
जिंदा रखें है
और हम भी जब तक
जिंदा है इनके
सिवा कोई कोईसमझ में नहीं आता
केवल इन्हीं की तरह
ही बच्चों के सिवा
हम भी तो बच्चे हैं साहब
चांद चाहिए तो चाहिए
बस हासिल कर रहेंगे
ऊपर वाला भगवान भी यह
अच्छी तरह जानता है
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश






