नारी तेरी लिखूँ कहानी।
ऐसी मेरी औकात नहीं।
तू अबला हो भोली भाली।
ऐसा मुझको तो भान नहीं।
बनकर लक्ष्मी बाई तू फिर
अंग्रेजों को मार भगाती हो।
अनसूया बनकर...
सर्वमान्य है जग में हिन्दी,
यह जन-गण की भाषा।
विश्व पटल पर राज करे यह,
है सबकी अभिलाषा॥
सब विधान शुचि सुंदर इसके,
है सबकुछ मर्यादित।
अभिव्यक्ति की भाव भंगिमा,
है...