जय जवान जय किसान

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शास्त्री जी के सपने पर कविता

रचना *डॉ अनमोल कुमार*

एक नारा गूँजा था, दिल्ली के आसमान में,

जय जवान, जय किसान, शास्त्री जी की जुबान में।

 

जवान खड़ा सरहद पर, सीने में जज्बा अपार,

किसान खड़ा खेत में, उगाता है जीवन का सार।

 

एक देश की रक्षा करे, दूजा पेट भरे,

दोनों के श्रम से ही, भारत का मान बढ़े।

 

शास्त्री जी का सपना था, भारत आत्मनिर्भर हो,

न भूखा सोए कोई, न दुश्मन से डर हो।

 

खेतों में हरियाली हो, सरहद पर शांति हो,

जवान-किसान दोनों से, देश में क्रांति हो।

 

जय जवान, जय किसान, यही है मूल मंत्र,

इसी से बनेगा भारत, दुनिया में स्वतंत्र।

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