देश और दुनिया में दस्तक देने जा रही डॉ रामशंकर चंचल की 17 वी अमेज़न कृति *समय से संवाद करती कविताऍं*
देश में अपना अद्भुत अद्भुत इतिहास रचते हुए आज डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ मध्य प्रदेश त्रैमासिक कृतियाँ निकाल कर सभी को चौका रहे, अक्सर लोग त्रैमासिक पत्रिका निकाल कर सो, पचास लोगों की रचनाओं को समेटे अहम समेटे जी रहे हैं वहां यह देश के सर्वाधिक पिछड़े अंचल झाबुआ जैसे आदिवासी जिले में रहते हुए जन्म से सतत् सक्रिय साधना और तपस्या करते हुए आज सम्पूर्ण दुनिया को देश को चीका दिया है सहज सरल व्यकित्व सादगी लिए अपने में जीता हुआ हर हाल में सृजन शील रहने की हुनर पाले आज देश के ख्यातीप्राप्त प्रकाशक इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा अपनी 17 वी अमेज़न कृति विश्व पटल पर दस्तक देन जा रहे हैं
सचमुच वंदनीय है झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले की पावन पवित्र धरा जिसने सम्पूर्ण दुनिया में साहित्य जगत में अपनी पताका फहराते हुई गर्व महसूस किया है वंदनीय है डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ की अथक मेहनत साधना और तपस्या सचमुच प्रेरणा देती है हजारों आनेवाली युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए






