बापू और शास्त्री जी

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बापू की अहिंसा ने, जग में दीप जलाया,

सत्य-धर्म की राह दिखाकर, भारत मान बढ़ाया।

 

चरखे की मधुरिम धुन ने, श्रम-संदेश सुनाया,

स्वावलंबन का मंत्र देकर, नव विश्वास जगाया।

 

सत्य-अहिंसा के बल पर, बापू आगे बढ़ते थे,

अन्यायों के आगे झुकना, हरगिज नहीं जानते थे।

 

शास्त्री जी का जीवन सरल, सच्चाई से भरा,

सादगी की प्रतिमूर्ति थे, मन था निर्मल खरा।

 

‘जय जवान-जय किसान’ का, गूँजा स्वर आकाश,

वीर जवान और अन्नदाता, दोनों देश की आस।

 

कर्मठता को धर्म मानकर, जीवन सफल बनाया,

देश-प्रेम की ज्योति जलाकर, जन-जन को समझाया।

 

बापू ने शांति की राह पर, चलना हमें सिखाया,

शास्त्री जी ने कर्म-पथ पर, भारत मान बढ़ाया।

 

सत्य, श्रम और साहस का, दोनों ने पाठ पढ़ाया,

अपने त्याग और तप से, भारत गौरव बढ़ाया।

 

आज उन्हीं की शिक्षाएँ, दीपक बन जलती हैं,

संकट की घनघोर घटा में, राह नई दिखती हैं।

 

बापू-शास्त्री के आदर्शों का, जग में रहे सम्मान,

इनसे ही जगमग करता है, मेरा प्यारा हिंदुस्तान।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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