विषय — गजल सृजन
काफिया — आते की बंदिश
रदीफ —हैं।
बहर –
सत्य-अहिंसा का दीप जला बापू राह दिखाते हैं,
प्रेम-शुभेच्छा के फूलों से जीवन को महकाते हैं।
सादा जीवन ऊँचे चिंतन का संदेश दिया जग को,
लाल बहादुर शास्त्री जी भी याद सभी को आते हैं।
कर्म करो फल की चिंता न करो गीता का ध्यान रहा,
सत्य-अहिंसा के पथ पर चल मानव धर्म सिखाते हैं।
वीर जवान किसानों कीजय-शास्त्री नेजयघोष किया,
भारत माँ का मान लिए हम त्याग-दया सिखलाते हैं।
गाॅंधी -शास्त्री के आदर्शों से जीवन भर ले अपना,
प्रासंगिक हैं सुरभि अभी भी उजियारा बिखराते हैं।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार






