मेरे प्यारे दादाजी और दादी जी,
सबसे न्यारे सबसे अच्छे,
यादों में आज बसे हैं दादाजी,
दादी की यादों ने बेचैन मन
को कर डाला है याद की आयी
आंखों में आंसू आया है,
कितनी मेहनत करते दादा दादी थे,
पैसा पैसा जोड़ के उन्होंने सुंदर बागवान बनाया है,
उस बगिया में फूल खिले रहे ऐसी बगिया को उन्होंने अपने हाथों से खुद सींचा है,
दिल में प्यार बसता दादा दादी के हृदय में बच्चों को समाया है,
देख कर पोते पोती का मुख दादा दादी के चेहरे पर अनोखा रंग आया है,
जो ज्ञान दादा दादी के अंदर वह कहां मिल पाया है,
वाकई दादी और दादाजी की छत्रछाया में हमने सुंदर बचपन बिताया है,
मेरे इतने प्यारे दादा और दादी जी को हृदय से राष्ट्रीय दादा दादी दिवस पर शत-शत नमन शत-शत नमन है।।
योगेश्वरी भारद्वाज
कोसीकला पत्र उत्तर प्रदेश






