झाबुआ के डॉ रामशंकर चंचल ने दुनियां को दी नई कविताओं की
पांचवीं कृति , समय से संवाद करती कविताएं
देश के ख्यातीप्राप्त सहज सरल व्यकित्व साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ ने दुनियां को नई कविताओं की पांचवीं अद्भुत कृति भेंट करने जा रहे है इंकलाब पब्लिकेशन बंबई से प्रकाशित चर्चित कृति है यह भी पूर्व उनकी अद्भुत लोकप्रियता हासिल कर चुकी रूप नहीं रूह है यह, मन होता हैं, डॉ रामशंकर चंचल की प्रतिनिधि कविताएं और डॉ रामशंकर चंचल की नई कविताएं जैसा अद्भुत महा ग्रंथ आया है
सचमुच बेहद विचारणीय प्रश्न है कि झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल में जन्म हुआ आजीवन जीवन व्यतीत करते हुए यहीं इस साधारण शिक्षक ने देश और दुनिया को चौका दिया है आज अपनी मौलिकता लिए अद्भुत अमेज़न कृतियों को भेंट करते हुए यह उनकी 17 वी अमेज़न कृति होगी जो मात्र तीन साल के भीतर सामने आई हुई सभी कृतियां हैं
इस को सदा ही ईश्वरीय आशीष मानते हुए डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ इतने सहज सरल व्यकित्व लगते है कि उन्हें देख कर कोई विश्वास नहीं कर सकता हैं कि यह वह शख्शियत है जो आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम है, डॉ रामशंकर चंचल ख़ुद भी मुस्काते हुए कहते है मुझे भी नहीं पता यह कि डॉ रामशंकर चंचल जो देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम है वह मैं ही हूं
सच तो यह है कि यह सब कुछ ईश्वर आशीष है रूह आशीष है जो सदा साथ रहते हुए झाबुआ को अमर करने का दायित्व मुझे सौंपा है
धन्य हुआ जीवन मेरा झाबुआ में जन्म हुआ प्रणाम करता हूं झाबुआ की देव भूमि को सत् सत् वंदन करता हूं उन सभी देवत्व इंसानों को जिन्होंने मुझे सदा ही साथ देते हुए यह नेक कार्य कराया






