आल्हा छंद विषय–+
लाल बहादुर शास्त्री
विधान मात्रिक छंद १६/१५पर यति३१ मात्रिक छंद चरणांत गुरु लघु २१
छोटे कद के एक मनुज थे, लाल बहादुर जिसका नाम |
देश-भक्ति का दिया जिन्होंने, भारत को संदेश ललाम ||
निकट बनारस रामनगर में,
जने बहादुर लाल कहाय |
पिता शारदा मातु दुलारी,
नमन करें सिर चरणों जाय ||
२
नया- नया आजाद हुआ था कमी अन्न की थी भरपूर |
राष्ट्रजनों की उदर क्षुधा से, रात सदा लगती थी दूर ||
शिक्षा प्रद उद्बोधन देकर,
किया युवाओं का आव्हान|
अपना जीवन लक्ष्य बनाया,
राष्ट्र हेतु करना बलिदान ||
३
गुरु समीप पढ़ने थे आये,
संबंधों की कर भरमार |
स्वतंत्र मन से करते सेवा,
जिनका हम सब पर उपकार ||
जय जवान का नारा देकर,
कृषक करें सब जय जयकार |
दया प्रेम को मन में भरते,
सारा जग जाता बलिहार ||
४
लाल बहादुर देश हितैषी, जीवन का सच्चा किरदार |
भारत छोड़ो आंदोलन में, अंग्रेजों को दी फटकार ||
धर्म -भक्ति को बढ़कर माना
राष्ट्रभक्ति उनकी पहचान |
देश -भक्ति कीअलख जगाई,
भारत करता हैअभिमान ||
५
बने देश के प्रधानमंत्री, पहचाना जग पहली बार |
करता पाकिस्तान युद्ध जब , दे दी फिर भारत ने हार||
गद्दारों को धूल चटा कर, जग में पाए थे सम्मान
जय जवान जय जय किसान का, , नारा पाकर जगे किसान ||
६
ताशकंद समझौता करने,
गया वहाँ भारत का वीर |
लौट कदापि न भारतआया,
यह घटना सुन सभी अधीर ||
कैसे उनकी मृत्यु हुई थी,
काला नीला पड़ा शरीर |
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश






