मवेशी चराने और चारा लेने खेतों की ओर जाने से कतरा रहे ग्रामीण, वन विभाग की सक्रियता पर उठे सवाल
महोली, सीतापुर। वन रेंज महोली क्षेत्र के नरनी गांव में बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। नरनी-ब्रह्मावली मार्ग से लेकर चक मार्ग और आसपास के खेतों तक पिछले कई दिनों से बाघ के पदचिह्न देखे जाने की बात सामने आ रही है। लगातार मिल रहे इन निशानों के बाद ग्रामीण खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के डर के कारण अब मवेशियों को चराने तथा उनके लिए चारा लेने के लिए भी खेतों की तरफ जाना मुश्किल हो गया है। लोगों ने वन विभाग को मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने की बात कही है।
सूचना मिलने पर वाइल्ड लाइफ गार्ड शोभाराम मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अकेले खेतों की ओर न जाएं, आवश्यकता होने पर समूह बनाकर ही बाहर निकलें और किसी प्रकार का खतरा महसूस होने पर तत्काल वापस लौट आएं।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी जन्माष्टमी के दौरान इसी क्षेत्र में बाघ के हमले की घटना हुई थी। नरनी गांव के तालाब के पास 22 वर्षीय सौरभ दीक्षित चारा काटने गए थे, तभी बाघ ने उन पर हमला कर दिया था, जिसमें उनकी जान चली गई थी। घटना के बाद वन विभाग की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कमांड ऑफिस भी बनाया गया था। वहीं, पिछले वर्ष क्षेत्र में तीन बाघों को ट्रैंकुलाइज कर पकड़े जाने की बात भी सामने आई थी।
पिछली घटना और वर्तमान में खेतों में बाघ के पदचिह्न मिलने के बाद ग्रामीणों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में निगरानी बढ़ानी चाहिए। वन रेंज अधिकारी कल्पेश्वर नाथ भार्गव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने जिला स्तरीय अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाने तथा गांव और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा एवं निगरानी बढ़ाए जाने की मांग की है।






