नवरात्रि

Date:

नवरात्रि का पावन पर्व, जग में मंगल छाया है,

माँ दुर्गा की आराधना से, हर मन पुलकाया है।

 

प्रथम दिवस शैलपुत्री माँ, पर्वतराज की लाली,

भक्तों को देती शक्ति, करती जीवन खुशहाली।

 

द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी, तप की ज्योति जगाती,

साधक के मन में संयम, श्रद्धा भाव बढ़ाती।

 

तृतीय दिवस चंद्रघंटा, सिंह पर सवारी करती,

घंटा की ध्वनि से माता, भय और संकट हरती।

 

चतुर्थ रूप कूष्मांडा, सृष्टि की रचना करती,

अपने तेज से जग में, जीवन ज्योति भरती।

 

पंचम स्कंदमाता हैं, कार्तिकेय की जननी,

ममता की छाया देकर, करती रक्षा जग की।

 

षष्ठम रूप कात्यायनी, दानव दलन कराती,

अधर्म मिटाकर जग में, धर्म ध्वजा फहराती।

 

सप्तम कालरात्रि माता, भय का नाश कराती,

अंधकार को हरकर जग में, उजियारा फैलाती।

 

अष्टम रूप महागौरी, पावन ज्योति सी छाई,

करुणा, शांति, सौभाग्य की, वर्षा जग में लाई।

 

नवम सिद्धिदात्री माता, सिद्धि वरदान दिलाती,

भक्तों के जीवन पथ को, सुख-समृद्धि से भर जाती।

 

जय-जय अम्बे जगदम्बे, सब मिल गान सुनाएँ,

नवरात्रि के पावन दिन में, माँ का आशीष पाएँ।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि”

मुजफ्फरपुर, बिहार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

लेटेस्ट खबरें

गांव-समाज की खबरें
Related

बिहार की माटी का अनमोल कलारत्न: संघर्षों की भट्टी में तपकर कुंदन बने प्रद्युम्न कुमार

गया/बिहार ईश्वर द्वारा निर्मित कुछेक व्यक्तित्वों के जीवन का...

आशीर्वाद का आगमन 

फुआ के आँगन की वह यादें पुरानी, जहाँ सजती थी...

नमन मंच

  आल्हा छंद विषय--+ लाल बहादुर शास्त्री विधान मात्रिक छंद १६/१५पर यति३१...

🎈जिन्दगी🎈

लिखो तो लिहाज है जिन्दगी , सीखों तो तकदीर है...