प्रभु कान्हा जन्मे जेल

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वर्षा जन्म काल प्रकट हुए कृष्ण लाल , की थी लीला कमाल, विष्णु रूप धारे।

काली बदरी विशाल ,पवन बहे चरम चाल,गरजे बिजली त्रि- काल, लीलाधर प्यारे।।

 

बसो हृदय नंद लाल , कमल नयन कंठ माल , पीत वसन कृष्ण डाल , मोरपंख सोहे।

 

छवि मनहर भाय श्याम , जपती प्रभु सुबह शाम , पावन है कृष्ण नाम , लीला है मोहे ।।

निधिवन में करें रास , गोपी की प्रेम प्यास , श्रद्धा की भक्ति आस , कान्हा है प्यारा।

मथुरा में जन्म आज , करे हृदय ईश राज , गीता का तारा।।

डॉ मंजु गुप्ता

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