बांसड़ा, भींडर की बहू चित्रलेखा व्यास को ‘साहित्य गौरव’ उपाधि, हिंदी दिवस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान
साहित्य के साथ तकनीकी शिक्षा में भी बनाई पहचान, देश-विदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं रचनाएँ
बांसड़ा/भींडर। बांसड़ा, भींडर की बहू एवं युवा लेखिका-कवयित्री चित्रलेखा व्यास ‘नीलचित्रा’ ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हुए क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें जयकिरण शोध शिक्षण संस्थान, बड़नगर जिला उज्जैन की ओर से ‘साहित्य गौरव’ मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। वहीं ‘साहित्य की दुनिया’ राष्ट्रीय साहित्यिक मंच, साहिबगंज (झारखंड) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की हिंदी दिवस प्रतियोगिता-2026 में उन्होंने देशभर के प्रतिभागियों के बीच द्वितीय स्थान प्राप्त कर राजस्थान और उदयपुर जिले को गौरवान्वतित किया ।
चित्रलेखा व्यास कानोड़ श्री गिरिजालाल व्यास की सुपौत्री एवं श्री मदन मोहन व्यास की पुत्री है ।
व्यास बांसड़ा, भींडर की बहू हैं। उनके पति श्री नीलेश चौबीसा तथा ससुर श्री गोविंदलाल चौबीसा हैं। पारिवारिक दायित्वों के साथ साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफर
चित्रलेखा व्यास ने कंप्यूटर एवं साहित्य दोनों क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने 2015 में कपासन से बीसीए किया। इसके बाद साहित्य के प्रति अपने लगाव को आगे बढ़ाते हुए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से बीए हिंदी साहित्य तथा एमए अंग्रेजी साहित्य की शिक्षा प्राप्त की।
इसके पश्चात उन्होंने जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी से हाल ही में एमसीए (MCA) की शिक्षा पूर्ण की। इस प्रकार उन्होंने तकनीकी शिक्षा के साथ साहित्य के प्रति अपने रुझान को भी निरंतर आगे बढ़ाया।
चित्रलेखा व्यास हिंदी, अंग्रेजी तथा राजस्थानी (मेवाड़ी) में लेखन करती हैं। वे कविता, गीत, कहानी एवं लोकगीत जैसी विभिन्न विधाओं में सक्रिय हैं।
‘साहित्य गौरव’ से सम्मानित
14 सितंबर को आयोजित सम्मान समारोह में चित्रलेखा व्यास को ‘साहित्य गौरव’ की मानद उपाधि प्रदान की गई। सम्मान-पत्र में उनकी साहित्यिक रचनाशीलता तथा साहित्य के माध्यम से समाज में सामाजिक चेतना जागृत करने के प्रयासों की सराहना की गई।
वहीं ‘साहित्य की दुनिया’ राष्ट्रीय साहित्यिक मंच, साहिबगंज (झारखंड) की ओर से 13 एवं 14 सितंबर को आयोजित हिंदी दिवस प्रतियोगिता-2026 में उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभागियों ने भाग लिया।
देश-विदेश में प्रकाशित रचनाएँ
चित्रलेखा व्यास की अनेक रचनाएँ विभिन्न समाचार-पत्रों, साहित्यिक पत्रिकाओं एवं ई-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, लोकजीवन, प्रकृति, नारी-सशक्तिकरण, मानवीय संवेदनाएँ एवं सामाजिक सरोकार प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं।
उनकी राजस्थानी रचना ‘बण री बेटी’ को साहित्य कला चेतना परिवार, नोहर द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस रचना को बेंगलुरु हिंदी अकादमी द्वारा प्रकाशित ई-साहित्यिक पत्रिका ‘उपल’ के सितंबर-अक्टूबर 2026 अंक में भी स्थान मिला है।
इसके अतिरिक्त अमेरिका से प्रकाशित ‘हम हिंदुस्तानी’ में उनकी रचना ‘मेरी परछाई’ प्रकाशित हुई है। वहीं जयपुर से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘अमृत राजस्थान’ में उनकी रचना ‘नन्ही कली’ प्रकाशित हुई है। उनकी कई अन्य रचनाएँ भी विभिन्न साहित्यिक मंचों एवं साझा काव्य-संग्रहों में प्रकाशित हुई हैं, जिनमें वे सहलेखिका के रूप में शामिल रही हैं।
साहित्य और तकनीक का अनूठा संगम
चित्रलेखा व्यास की साहित्यिक यात्रा की विशेषता यह है कि उन्होंने तकनीकी शिक्षा के साथ अपनी साहित्यिक अभिरुचि को भी निरंतर जीवित रखा। कंप्यूटर साइंस एवं टेक्नोलॉजी में एमसीए करने के साथ वे साहित्य के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय हैं।
वे हिंदी एवं राजस्थानी (मेवाड़ी) में कविता, गीत, कहानी और लोकगीत लिखती हैं। उनकी रचनाओं में अपनी मिट्टी, भारतीय संस्कृति, लोकजीवन, प्रकृति, मानवीय रिश्तों, नारी-सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकारों के प्रति गहरा जुड़ाव दिखाई देता है।
वर्ष 2026 में विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से प्राप्त सम्मान, राष्ट्रीय स्तर की हिंदी दिवस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान तथा देश-विदेश में रचनाओं के प्रकाशन ने उनकी साहित्यिक यात्रा को नई पहचान दी है। बांसड़ा, भींडर की बहू चित्रलेखा व्यास ‘नीलचित्रा’ की इन उपलब्धियों से क्षेत्र के साहित्यिक जगत में हर्ष का माहौल है।






