शीर्षक मन का पंछी घायल
मन का पंछी घायल
किसे कहूँ उर की पीड़ा ,रोती मेरी पायल ।
जो कुछ तुमसे है सीखा, सदा रहूँगी कायल ।
जब याद सतावे तेरी, बहे नैन से काजल।।
नहीं सहूँगी अब ताने, मन मेरा है कोमल।
बोलो कुछ मीठी वाणी ,जैसे गाती कोयल।।
करूँ अर्चना देवी की,पुष्प चढाती पाटल।
भोग चढ़ाने हेतु रखूँ , केले की शुभ पातल।।
हृदय झूमता पुलकित सा , पवन उड़ाये आंचल।
द्वारे होवे आहट सी, खोलूँ जल्दी साँकल।।
आंंधी तूंफां जब चलते, मौसम लगता पागल।
आस्मां छारही घटायें ,उमड़ रहे हैं बादल।।
आशा जाकड़ ‘आस ‘इन्दौर






