स्वामी विवेकानंद के कहे पर दस्तक देता डॉ रामशंकर चंचल आज अपनी मौलिकता से विश्व पटल पर छाया हुआ
भारत के मध्य प्रदेश आदिवासी जिले झाबुआ में दस्तक देते डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ ने सैकडो सैकडो विद्वानों को पढ़ा
पर उन्हें सदा स्वामी विवेकानंद जी की यह बात दिल और दिमाग में दस्तक देती रही कि, सबको पढ़ो पर अपना रास्ता ख़ुद बनाओ
किसी पर अमल नहीं करते हुए यही आपकी अद्भुत पचान होगी
डॉ रामशंकर चंचल ने आज इसी बार पर अमल करते हुए अपने पूर्ण रूप से मौलिक सृजन शील हो देश और दुनिया को चौका दिया सैकडो चाहने वालों पाठकों का बेशुमार प्यार और आशीष पा रहे डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ जिन्होंने वही लिखा है अस्सी प्रतिशत से ज्यादा महत्वपूर्ण सार्थक विचारणीय जो सदियों से अछूता रहा या नाम मात्र लिखा गया है
यही वजह है कि आज सैकड़ों युवा पीढ़ी के साथ साथ हर पाठक उन्हें पढ़ता है और फिर पढ़ता रहता है सहज सरल भाषा शैली में व्यक्त जीवंत सजीव रचनाओं की अद्भुत मिसाल का नाम है डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ
सचमुच धन्य है झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले जहां साहित्य को बेशुमार प्यार और आशीष दिया गया सम्मान दिया गया और देश और दुनिया में साहित्य का अलख जलाये रखा है
साहित्य वो नहीं जो सोच और चिंतन के साथ बल्कि साहित्य वो है जो मन आत्मा से निकल आया शब्दों का अद्भुत अद्भुत सत्य ईश्वर आशीष है






