जो ढल के नयी सुबह लाये
वो रात हैं हम!
छोड़ देते हैं लोग रिश्ते बनाकर,
जो कभी न छूटे,
वो साथ हैं हम।
आओ चलो रिश्तों की
शान बन जाएँ,
एक दूजे के लबों की
मुस्कान बन जाएँ,
हम तुम निभाए अपनी यारी
इस तरह,
दुनिया में हम दोस्ती की
पहचान बन जाएँ !
जो कोई समझ न सके
वो बात हैं हम!
यादें अक़्सर होती हैं सताने के लिए,कोई रूठ जाता है,
फ़िर मान जाने के लिए,
रिश्ते निभाना कोई मुश्किल तो नहीं,बस दिलों में प्यार चाहिए उसे निभाने के लिए।
छुपे-छुपे से रहते हैं,
सरेआम नहीं होते !
कुछ रिश्ते सिर्फ़ एहसास हैं,
उनके नाम नहीं होते..!
जो रिश्ते गहरे होते हैं
वोही रिश्ते सच्चे हैं,
जो एहसान नहीं जताते !
वोही रिश्ते अच्छे हैं,
जो अपनेपन का शोर नहीं मचाते..!!!
-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।






