दुनिया में आतंक मचाए ,ऐसा प्राणी मानव आतंकी कहलाए।
मानवता से दूर, लोगों का खून बहाएं।
समाज में नफरत का जहर फैलाएं।
निर्दोष जनों को धमकाए ।
निजी स्वार्थ में आतंक मचाए ।
ऐसा व्यक्ति आतंकी कहलाए।
आतंकवादी का कोई धर्म ,जाति नहीं होता, आतंकवाद फैलाएं।
कर्मों से हैवान बनकर दुनिया को सताए ।
आवो आतंकी के आतंक को समूल मिटाए ।
आतंकी,गन ,पिस्टल ,बारूद से दिल दहलाये ।
पैसों की खातिर दुनिया को खूब सताए ।
आओ हम सब ऐसे आतंकी, आतंकवादियों को मिटाए ।
भारत माता अभिनंदन दिवस पर, संकल्प करें,भारत से आतंक को दूर भगाएं ।
खुश होगी भारत माता हम संकल्प करें ,आतंकवाद को जड़ से मिटाए। रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है।






