सत्य-अहिंसा का दीप जलाया, गांधी ने संसार जगाया,
भारत माँ के वीर सपूत ने, आज़ादी का बिगुल बजाया।
लाठी लेकर चल पड़े अकेले, फिर भी अंग्रेज़ी सत्ता हारी,
सत्याग्रह की शक्ति के आगे, झुक गई हुकूमत सारी।
हे बापू! तेरे सत्य के आगे, झूठ कभी टिक पाया नहीं,
तेरे दिखलाए पथ से बढ़कर, कोई पथ हमें भाया नहीं।
शास्त्री जी ने देश पुकारा—अब भारत को आगे बढ़ना है,
जय जवान और जय किसान से भारत का गौरव गढ़ना है।
सादा जीवन, ऊँचे आदर्श,माथे पर स्वाभिमान रहा,
देश धर्म के लिए समर्पित भारत का वह लाल महान रहा।
सीमा पर जो वीर खड़े हैं, उनको नमन हमारा है,
खेतों में जो अन्न उगाएँ, उनका भी जयकारा है।
गांधी का सत्य,शास्त्री का साहस,दोनों की अमर कहानी,
इनके पथ पर चलकर ही तो बनेगी भारत की निशानी।
दो अक्टूबर का दिन कहता—वीरों को सम्मान करो,
सत्य, श्रम और देशभक्ति का, दिल में सदा स्थान करो।
बापू का संदेश हमारा, शास्त्री जी का मान रहे,
भारत माँ की आन रहे और, ऊँचा हिंदुस्तान रहे।
जय जवान! जय किसान! का, गूँजे हर घर में नारा,
गांधी-शास्त्री के सपनों का, भारत हो सबसे प्यारा!
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश






