झाबुआ, मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़ अंचल के साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल की नई कविताएं, इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित चर्चित महा ग्रंथ अब आज से अमेज़न पर उपलब्ध होगा जिसका सम्पूर्ण देश और दुनिया में बेसब्री से इंतजार था, कृति आने से पूर्व ही
हजारों हजारों हस्तियां द्वारा देश और दुनिया द्वारा अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं बंटोर चुकी है
यह डॉ रामशंकर चंचल की 16 वीं अमेज़न कृति होने के साथ विश्व पटल पर दस्तक देती कविता की चौथी महत्वपूर्ण कविता कृति है जो 160 पेज़ में 51 दुर्लभ कविताओं के साथ सामने आई है
आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ जैसे जिले में रहते हुए जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल ने इतिहास रचा है कि झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल में रहते हुए भी आज विश्व धरा पर दस्तक दे कविताओं की अद्भुत अद्भुत चौथी कृति भेंट कि है हिन्दी साहित्य को जिंदा रखें विश्व पटल पर दस्तक देती
महत्वपूर्ण यह भी है कि सैकड़ों कृतियां देश को भेंट करने वाले डॉ रामशंकर चंचल ने आज विश्व पटल पर अमेज़न पर 16 कृतियों को भेंट किया है
गर्व है झाबुआ जिले सहित पूरे देश को उनके अद्भुत साहित्य योगदान पर ,जिन्होंने सारा जीवन
हिंदी साहित्य सेवा में पूरी रात जाग कर व्यतीत कर दिया और आज झाबुआ जिले को अमर कर दिया सम्पूर्ण दुनिया में
धन्य धरा झाबुआ जहां डॉ रामशंकर चंचल जैसे विरले साहित्य साधक का सरस्वती पुत्र का जन्म हुआ






