तुम मेरी जिंदगी का उजाला हो

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हमने अपने रिश्ते में,

खुशियों के मौसम नहीं देखे,

कभी गम देखा,

कभी तनहाई आई,

कभी कांटे मिले,

कभी आंखें भर आईं।

 

फिर भी हम दोनों ने,

एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा,

मैं गिरी तुमने संभाला,

तुम लड़खड़ाए मैंने थामा,

यही तो हमारा प्रेम है,

जो हमें एक साथ बांधे रखता है।

 

बढ़ती उम्र के साथ-साथ,

बिन बोले भी अक्सर,

हम खामोशी समझ जाते हैं,

साथ बैठकर हम दोनों,

एक गर्म चाय की प्याली,

बस यूं ही जिंदगी जीते जाते हैं।

 

तुम मेरी जिंदगी का उजाला हो,

तुम्हारा साथ अक्सर,

एक सहारा लगता है,

खामोश रहकर हम दोनों ने,

जीवन का सफर तय किया,

यह साथ हमेशा यूं ही बना रहे।

 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍️

अमरावती महाराष्ट्र।

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