संवाददाता-विजय सैनी
नैमिषारण्य(सीतापुर)दी ग्राम टुडे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के सरकार के बड़े-बड़े दावों को जमीनी स्तर पर प्रशासनिक उदासीनता किस तरह ठेंगा दिखा रही है, इसकी जीती-जागती मिसाल मिश्रिख तहसील के ग्राम सभा मनिकापुर में देखने को मिल रही है। यहां सरकार द्वारा करोड़ों रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ यानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।सी एम ओ बोले जांच होने पर होंगी कार्यवाई लाखों-करोड़ों की लागत से बनी इस आलीशान और नई बिल्डिंग की सुध लेने वाला कोई नहीं है। रख-रखाव के अभाव में पूरा अस्पताल परिसर आज बड़ी-बड़ी झाड़ियों और जंगलों के बीच छिप चुका है। अस्पताल के चारों तरफ उगे ऊंचे-ऊंचे घास-फूस और गंदगी के कारण यह स्वास्थ्य केंद्र किसी डरावने खंडहर जैसा नजर आने लगा है। जिस जगह को मरीजों के इलाज के लिए साफ-सुथरा होना चाहिए था, वह आज सांप-बिच्छुओं और लावारिस पशुओं का ठिकाना बन चुकी है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने बड़े उत्साह के साथ इस क्षेत्र को चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए यह स्वास्थ्य केंद्र बनवाया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के चलते इस स्वास्थ्य केंद्र की यह दशा हुई है। करोड़ों रुपए की लागत से बनी यह सरकारी संपत्ति अब धीरे-धीरे जर्जर हो रही है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे की बर्बादी है।स्थानीय निवासी प्रदीप ने बताया की जनता के टैक्स से सरकार इतनी बड़ी बिल्डिंग बनवाती है तथा उसके रखरखाव के लिए जिम्मेदार बिल्कुल ध्यान नहीं देते करोड़ों रुपए की लागत से यह बिल्डिंग बनाई गई होगी जिसका जिसको देखने वाला कोई जिम्मेदार है ही नहीं। वहीं राहगीर राकेश ने बताया कि स्थानीय जिम्मेदारों द्वारा यदि एक सप्ताह या महीने में एक बार संपूर्ण परिसर की सफाई करा दी जाती तो शायद इतनी गन्दगी और घास न होती। इस संबंध में सीतापुर सीएमओ डॉक्टर सुखरंजन ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। मामले की जानकारी कर साफ-सफाई सुनिश्चित कराई जाएगी तथा जिम्मेदारों को निर्देशित किया जाएगा।






