अमित मिश्रा
महोली, सीतापुर (दी ग्राम टुडे )भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मंदिरों और धार्मिक स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां तैयार की जा रही हैं। पर्व को लेकर बाजारों में भी रौनक दिखाई दे रही है और लोग जन्माष्टमी की तैयारियों में जुटे हैं।
मान्यता है कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचार और अधर्म का अंत कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया। उनका जीवन मानव समाज को कर्म, प्रेम, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। रात्रि में श्रीकृष्ण जन्म के समय मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान के जन्म का समय होता है, मंदिरों में ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज उठते हैं।
” बाल रूप में सजेंगे लड्डू गोपाल ”
जन्माष्टमी पर घरों में भी विशेष तैयारियां की जाती हैं। श्रद्धालु लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार करते हैं और पालना सजाकर भगवान को झूला झुलाते हैं। माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल एवं विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है।
” मंदिरों में आकर्षक झांकियों की तैयारी ”
नगर क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर सजावट का कार्य अंतिम चरण में है। कहीं बाल कृष्ण की माखन चोरी की झांकी तो कहीं गोवर्धन पर्वत धारण करते हुए भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगा। धार्मिक आयोजनों को लेकर मंदिर समितियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
” भक्ति और संस्कृति का पर्व है जन्माष्टमी ”
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है। भगवान श्रीकृष्ण का संदेश आज भी समाज को प्रेम, सद्भाव, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।






