किरण कुमारी ‘वर्तनी’जमशेदपुर
आरक्षण की लाठी भाँजी ,जन में जन्मा रोष।
भेद -भाव शिक्षा में क्यों हो, बच्चों का क्या दोष ।।
प्रश्न करे है बाल हमारे ,ऐसा क्यों मम् संग ।
रात दिवस हम एक किए हैं, भरने जीवन रंग।
चयन प्रणाली नियम देखकर , किसे हुआ संतोष ।।
आरक्षण की….
अब अपंग निर्धन को देना, संस्थानों में स्थान ।
सक्षम जो धन तन दोनों से , है सब एक समान।।
पढ़े- लिखे बच्चों से ही तो, भारत की जयघोष ।
आरक्षण की लाठी….
नहीं जाति में शिक्षा बाँटे, घर-घर की आवाज ।
प्रगति स्तंभ यूँ हिल जाएगा ,बात समझ ले आज ।।
हर योग्यता की झोली में, भरे खुशी के कोष।।
आरक्षण की लाठी…..






