श्रद्धा से स्वागत करें, तर्पण दें सम्मान।
पितृ पक्ष है आ गया, पूजन पूर्ण विधान।।
पितृ पक्ष में दान कर, पितर किया है मान।
जो पसंद भोजन रहे, खिलवाना यजमान।।
श्रद्धा से वंदन करें, कागा श्वान जिमाय।
पाते शुभ वरदान तब, गया गए बैठाय।।
श्राद्ध पितरों का करे, तर्पण पूर्ण विधान।
उनके आशीर्वाद से, मिलता जग सम्मान।।
तर्पण जौ तिल से करो, तब होता कल्याण।
प्रेम भाव कर काम को, मिले तभी निर्वाण।।
वंश वृक्ष की जड़ यही, पितरों से सुखसार।
जिनसे सीखा सत्य पथ, जीवन का आधार।।
श्राद्ध अक्षय फल मिले, देते हैं आशीष।
उनको करते हम नमन, सदा झुका कर शीश।।
पितरों की जब तिथि रहे, निर्मल रखना भाव।
वंश तभी गौरव बने, देते सबको छाव।।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश






