चालीस साल से पूरी रात जाग रहे, डॉ रामशंकर चंचल
ऐसे विरले कितने लोग है जो आज के समय साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम सोचे कुछ देर के लिए जो चालीस साल से ज्यादा समय से पूरी रात जाग कर सृजन शील है और बेशुमार लिखा है जो उन्हें नहीं पता कितना कुछ लिखा है
किसी भी व्यक्ति के जीवन में इससे बड़ा इतिहास यह क्या कम है कि यह चालीस साल से साहित्य साधक और तपस्या कर रहा है
डॉ रामशंकर चंचल कह्ते है कि यूं ही नसीब नहीं हुआ मुझे कुछ भी मेरी सतत् साधना और तपस्या का सुखद परिणाम है और यह कोई मज़ाक नहीं है कि डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ चालीस साल से जाग रहे मै खुद भी आश्चर्य चकित हूं जैसे यह सब चल रहा है कौन है जो मुझे विवश करता है पूरी रात जागने को सृजन शील रहने को, बहुत बहुत प्रयास करता हूं आज सो जाता हूं पर नींद खुशी दूर होती हैं मुझसे और जब तक कुछ ईश्वर आशीष से जन्म हो रहा है चल रहा हैं दिल दिमाग में लिख नहीं लेता नींद नहीं आती है उसके लिखते ही पूर्ण होते है स्वतं नींद आने लगती हैं आज तक नहीं जान पाया ऐसा क्यों यही वजह है कि अब तो सब कुछ राम भरोसे है राम जाने उसकी महिमा उसकी चाह वह क्या चाहता है मुझ से






