दि ग्राम टुडे, कानपुर। पत्रकारिता को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कानपुर जर्नलिस्ट क्लब द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को भेजे गए ज्ञापन पर राष्ट्रपति सचिवालय ने त्वरित संज्ञान लिया है। *क्लब के महामंत्री अभय त्रिपाठी द्वारा 22 जून 2026 को भेजे गए ज्ञापन पर मात्र दो दिनों के भीतर कार्रवाई करते हुए 24 जून 2026 (बुधवार) को राष्ट्रपति सचिवालय ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को अग्रेषित कर दिया।*
राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव अशोक कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति को संबोधित याचिका स्वयं स्पष्ट है तथा इसे उपयुक्त ध्यानाकर्षण एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को भेजा जा रहा है। साथ ही मामले में की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कानपुर जर्नलिस्ट क्लब की ओर से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया था कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की आधारशिला है, लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारों पर हमले, धमकी, उत्पीड़न और झूठे मुकदमों जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए प्रभावी संवैधानिक एवं कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।
ज्ञापन में क्लब ने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें प्रेस एवं पत्रकारिता की स्वतंत्रता को स्पष्ट संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने, पत्रकारिता को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में संस्थागत मान्यता देने, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा अधिनियम बनाने, मीडिया की स्वतंत्रता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक दर्जा प्राप्त राष्ट्रीय मीडिया आयोग के गठन तथा पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नयन और आधुनिक संसाधनों के विकास हेतु राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की मांग शामिल है।
*महामंत्री अभय त्रिपाठी* ने कहा कि राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा ज्ञापन पर शीघ्र संज्ञान लिया जाना पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की चेतना और जनहित का प्रहरी है। एक मजबूत, स्वतंत्र और उत्तरदायी पत्रकारिता ही लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बना सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगी। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा ज्ञापन को मुख्य सचिव के पास भेजे जाने के बाद अब पत्रकार समुदाय की निगाहें राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।







