तुम झरोखे में आती जाती रहना दीदार को बेचैन है नैना
मेहंदी लगाके रखना दरवाजा खुला रखना सॉझे डोली तैयार है आने को!!
बाहें खुली रखना आशिक बेचैन है तुझे पाने को!!
दिल के झरोखे खुले रखना धड़कने बेचैन है तेरी धड़कने सुनने को!!
मेरे ख्वाबों की दुनिया कहीं अधूरी ना रह जाए !!
बस तू !! एक झलक देख लेना मेरे बेचैन मन को!!
मेरी उजड़ी बगिया में फिर से गुलाब महक जाए!!
तेरी दहलीज मेरा झरोखा बेचैन है अपना मिलन कराने को!!
शांत बहती नदिया में तेरी परछाई दिखती है!!
अपने मन की श्वेत चांदनी में मेरे मन को दर्पण बना लेना!!
इस दिलदार को आशिक नहीं तो झरोका समझ के ही अपना लेना !!
आओ इस दिल के झरोखे में हम तुम गुम हो जाते हैं !!
आज कुछ तुम कहो!! कुछ हम सुनाते हैं!!
हम तो ताउम्र तेरी पलकों के झरोखे में कैद होना चाहते हैं !!
सच कहता हूं! !मान भी जाओ तेरे इश्क के झरोखे से दूर हम जाना नहीं चाहते!?
नाम शिवा सिहंल आबूरोड🙏






