
दि ग्राम टुडे, कानपुर नगर।
कभी अपनी जिंदगी में उम्मीद की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची दिव्यांग बेटी खुशी गुप्ता की कहानी अब संवेदनशील शासन और मानवीय पहल की मिसाल बन चुकी है। जिस परिवार के सामने कभी बेटी के इलाज, पढ़ाई और रोजी-रोटी का संकट था, आज उसी परिवार के चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद शुरू हुई मदद अब लगातार खुशी और उसके परिवार के जीवन को नई दिशा दे रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को कानपुर कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपकर परिवार को आत्मनिर्भरता का बड़ा सहारा दिया।
यह ई-रिक्शा एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया, ताकि परिवार को स्थायी आजीविका का साधन मिल सके।

कल्लू गुप्ता अब तक किराये का ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। कमाई का बड़ा हिस्सा किराये में चला जाता था और हाल ही में सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई थी। ऐसे कठिन समय में प्रशासन ने पहल करते हुए परिवार को अपना ई-रिक्शा उपलब्ध कराया, जिससे अब उनकी आय स्थिर हो सकेगी।
दरअसल, खुशी गुप्ता की संघर्षगाथा उस समय चर्चा में आई थी जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने उससे आत्मीयता से मुलाकात कर अधिकारियों को उसके इलाज, शिक्षा और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में असमर्थ रही खुशी अब पहले से बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी के चलते उसने बोलना भी शुरू कर दिया है। उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक आवासीय विद्यालय में कक्षा-9 में उसका प्रवेश कराया गया है।
ई-रिक्शा मिलने के बाद खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “थैंक यू योगी जी।” वहीं उसकी मां गीता गुप्ता की आंखों में राहत और संतोष साफ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि पहले बेटी के इलाज और पढ़ाई की चिंता थी, लेकिन अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में कोई कमी न रहने पाए। उसी सोच के अनुरूप इलाज, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा केवल सहायता देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।






