
दि ग्राम टुडे, कानपुर।
कानपुर की बदहाल सड़कों और विकास के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई। शहर की चर्चित 80 फीट रोड पर अचानक सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के नीचे से गुजर रहे पुराने “डबल डॉट नाले” के धंसने की वजह से यह हादसा हुआ है। हालांकि अधिकारी अभी जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन जनता पूछ रही है कि आखिर हर बार सड़क धंसने के बाद ही प्रशासन की नींद क्यों खुलती है?
घटना के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई। सड़क के बीच बने बड़े गड्ढे को देखकर लोग यही कहते नजर आए कि “लगता है विकास खुद जमीन में समा गया।” राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त वहां कोई भारी वाहन नहीं गुजर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों पुराने नालों और सीवर लाइनों की हालत बेहद खराब है, लेकिन जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजों में मरम्मत कराते हैं। सड़क बनते समय करोड़ों के विकास कार्यों के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली बारिश और जर्जर नालों के दबाव में सड़कें जवाब दे देती हैं। लोगों का कहना है कि यहां कई दिनों से सड़क के नीचे खोखलापन महसूस हो रहा था, लेकिन शिकायतों के बावजूद किसी अधिकारी ने मौके पर आकर देखने की जरूरत नहीं समझी।
घटना के बाद नगर निगम, जलकल और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। निरीक्षण हुआ, फोटो खिंचे, मोबाइल कैमरों से वीडियो बने और फिर वही पुराना बयान सामने आया— “जांच कराई जा रही है, दोषियों पर कार्रवाई होगी।” शहर की जनता अब यह समझ नहीं पा रही कि सड़क ज्यादा तेजी से धंस रही है या जिम्मेदारी।
जनप्रतिनिधियों की बात करें तो चुनाव के समय यही सड़क “विकास की लाइफलाइन” बताई जाती थी। बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे, फीते कटे थे और दावे किए गए थे कि शहर की तस्वीर बदल दी जाएगी। अब जब सड़क जमीन में समा गई है तो जनता तंज कस रही है कि शायद विकास इतनी तेजी से हुआ कि सड़क नीचे तक पहुंच गई।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क धंसने से आवागमन प्रभावित हुआ है और हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है। लोगों ने मांग की है कि सिर्फ गड्ढा भरने की खानापूर्ति न हो, बल्कि पूरे इलाके के पुराने नालों और भूमिगत ढांचे की जांच कराई जाए ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।
फिलहाल प्रशासन ने इलाके को बैरिकेडिंग कर घेर दिया है, लेकिन जनता का कहना है कि अगर समय रहते निगरानी और मरम्मत होती तो सड़क को यूं “भू-समाधि” नहीं लेनी पड़ती।
कानपुर की 80 फीट रोड धंसी: सड़क गई अंदर, जिम्मेदार अब भी “निरीक्षण” में व्यस्त
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