अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध-दिवस प्रति वर्ष साल 1 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों के योगदान का सम्मान करना और उनकी समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाना है।
*अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस का प्रारंभ –
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 दिसंबर 1990 को प्रस्ताव पास करके प्रति वर्ष 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
*प्रथम आयोजन:- यह दिवस पहली बार 1 अक्टूबर 1991 को मनाया गया था।
*समर्पण:- यह दिन पूरी तरह से वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, स्वास्थ्य और उनकी भलाई के लिए समर्पित है।
*महत्व :-
*सम्मान और कृतज्ञता:-
यह दिन बुजुर्गों द्वारा परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए दिए गए अमूल्य योगदान को मान्यता देता है।
*अधिकारों की सुरक्षा:-
बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, उपेक्षा और अन्याय को रोकने के लिए समाज को जागरूक किया जाता है।
*स्वास्थ्य और देखभाल:-
वृद्ध व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उचित पोषण और एक सम्मानजनक जीवन देने के लिए नीतियां बनाने पर जोर दिया जाता है।
*पीढ़ीगत जुड़ाव:-
यह नई पीढ़ी को बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने और उनके प्रति प्रेम व आदर का भाव रखने की प्रेरणा देता है।
अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उदाहरणार्थ -:
*सम्मान समारोह:- वृद्धाश्रमों और सामाजिक संस्थाओं में बुजुर्गों को सम्मानित किया जाता है, उपहार दिए जाते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम रखे जाते हैं।
*स्वास्थ्य शिविर:- वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर (Health Check-up Camps) लगाए जाते हैं।
*जागरूकता अभियान:- समाज में बुजुर्गों के योगदान की सराहना करने और उनके अधिकारों तथा सुरक्षा के प्रति सेमिनार व कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
*परिवार के साथ समय:- लोग अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताते हैं, उन्हें बाहर घुमाने ले जाते हैं या उनकी पसंद का भोजन तैयार करते हैं।
अंततः मैं यह कहना चाहूंगी कि उपरोक्त बातें प्रत्येक घर,गाँव,शहर और देश-विदेश में प्रतिदिन अमल में लाई जानी चाहिए।
धन्यवाद!
लेखिका –
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन,
रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।






