गूंज रही हर घर आंगन में,
गणपति की जयकार।
भाद्रपद की पावन बेला,
लेकर आई खुशियों की बहार।
रिद्धि सिद्धि संग खुशियां लाए,
मां पार्वती के दुलारे।
मंगल मूर्ति बनाकर आए,
सारे विघ्नों को हरने वाले।
जीवन के दुख दर्द भुलाकर,
गणपति को हृदय में बसाए।
दुर्गा मोदक और फूल चढ़ाकर,
बप्पा के चरणों में शीश झुकाए।
हे गणनायक हे सुख दाता,
ज्ञान और बुद्धि का दीप जलाना।
हर वर्ष प्रेम से बप्पा,
हमारे घर में यूं ही आना।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।






