इलाहाबाद में संगम करतीं गंगा,
यमुना सरस्वती।
अयोध्या के पावन धाम को
सरयू नदी पखारती।
घाघरा, गंडक, कोसी
और गोमती निर्मल नदियाँ।
प्रकृति ने इस धरती को कितना अनुपम उपहार दिया।
सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, चलीं पंजाब,
ब्रह्मपुत्र पूरब में, बहे कलकल करते नाद।
विंध्य, सतपुड़ा बीच बहे नर्मदा न्यारी
ताप्ती, चंबल, बेतवा, सोन, महानदी प्यारी।
गोदावरी को दक्षिणी गंगा,कहता है संसार।
कृष्णा, कावेरी, तुंगभद्रा, बहतीं निर्मल धार।।
पर्वत राज , हिमालय का सबसे ऊँचा माथा,
एवरेस्ट, कंचनजंगा की शान में मन है गाता।
काराकोरम में K2 खड़ा, दुनिया का दूसरा शिखर
सह्याद्रि पश्चिमी घाट, अनामुडी है शिखर महान,
पूर्वी घाट, नीलगिरि, विंध्याचल भारत की शान।
नदियाँ जीवनदायिनी, पर्वत पहरेदार.।
इन्हीं से अपने भारत का बनता सुंदर, पावन,संसार।।
संगीता शिवपुरी






