भारत पे जो आँख उठाए,
दुश्मन तेरी खैर नहीं।
मातृभूमि पर रहे समर्पित,
उससे कोई बैर नहीं।।
भारत माँ की पावन माटी,
हमको प्राणों से प्यारी है।
शीश झुके न राष्ट्रध्वजा का,
जिद अब यही हमारी है।।
गाथा वीरों की याद रहे,
जो अपने हैं, कोई गैर नहीं।
भारत पे जो आँख उठाए,
दुश्मन तेरी खैर नहीं।।
सीमा पर जो डटे हुए हैं,
उनका हम सम्मान करें।
एक तिरंगा, एक भावना,
भारत का गुणगान करें।।
जाति-धर्म के भेद मिटाना,
मन में रखना बैर नहीं।
भारत पे जो आँख उठाए,
दुश्मन तेरी खैर नहीं।।
वीरों के बलिदानों की,
गाथा सदा सुनाएँ हम।
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रख,
नव इतिहास बनाएँ हम।।
प्राण सदा न्योछावर माँ पर,
इससे बढ़कर ध्येय नहीं।
भारत पे जो आँख उठाए,
दुश्मन तेरी खैर नहीं।।
एक रहें हम, नेक रहें हम,
देशहित में काम करें।
भेदभाव की दीवारें तोड़ें,
भारत का उत्थान करें।।
शांति, प्रेम का दीप जलाएँ,
रखें मन में बैर नहीं।
भारत पे जो आँख उठाए,
दुश्मन तेरी खैर नहीं।।
कविराज डॉ०-शिवकुमार सिंह ‘शिव’
दुसौंती, रायबरेली-229306






