आज सुनों मेरे सुरम्य भारत की कहानी
विविधता से भरे प्रांतों की पहचान पुरानी
जिसकी माटी को सींचते वीर , बलिदानी
जिसमें गूँजती बुद्ध , नानक, सूर की वाणी ।
भारत को लूटा लोदी , बाबर अनेकों ने
समा गए भारत माँ में हुए न पराए
अत्याचारों से संस्कृति को मिटा न पाए
महिमा भारतीय संस्कृति की जग है गाए ।
जीवन दर्शन ,संस्कारों की यह तपोभूमि है
हरिश्चन्द्र ,अशोक , गांधी की धर्मस्थली है
परहित में पन्ना दे अपने लाल की कुर्बानी
देह में से दें अपनी हड्डी दधीचि दानी ।
भारत देश हमको प्राणों से भी है प्यारा
सभ्यता , संस्कृति , मूल्यों की सुरभि से भरा
जहाँ बहती ज्ञान ,योग ,अध्यात्म की धारा हिमालय से घिरी है वन , पर्वत , घाटी धरा ।
विविध इसका खान – पान , वेश भूषा परिवेश
किंतु सब में हैं एक राष्ट्र चेतना के भाव
विभिन्न भाषाओं से जुड़ा हुआ है यह देश
आत्मसात करता सब की संस्कृति समभाव । डॉ मंजु गुप्ता






