11 सितंबर को मनाते भारत माता अभिनंदन दिवस ,करते भारत माता की गौरव गाथा का गुणगान।
11 सितंबर 1893 को शिकागो अमेरिका धर्म सम्मेलन में, स्वामी विवेकानंद जी ने सनातन धर्म किया गुणगान।
इस पावन स्मृति में हम भारतीय, 12 वर्ष से मना रहे हैं भारत माता अभिनंदन दिवस महान- महान।
भारत भूमि स्वर्ग समान , अवतरित होते देवी -देवता- भगवान।
भारत माता का मुकुट ,उत्तर में हिमालय पर्वत, तीन दिशाओं में सागर लहराता ,छूता आसमान
पावन नदियां सरस्वती -गंगा -यमुना ,बहती भारत में सुख- समृद्धि का देती वरदान।
हवा में गूंजता रहता ,जय हिंद जय भारत ,जय भारती, जय हिंदुस्तान।
देशवासी रहते हैं, आपस मे हिलमिलकर, सद्भाव, सहिष्णुता से, कहलाते सच्चे इंसान
विविधता में एकता, जिसकी पहचान है।
अलग अलग ,पहनावा,भिन्न भाषाएं हैं, भारत माता की रक्षा में देंगे बलिदान।
तिरंगा लेकर साथ बढ़ेंगे ,तिरंगा है देश की शान-बान और शान।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक विस्तृत देश हमारा, अनेकता में एकता है पहचान।
भारत माता ,सनातन संस्कृति, भारत मातृभूमि पर गौरव अभिमान।
भारत को विश्व का जगत गुरु बनाएंगे, मेरा भारत देश है महान ।
हम सब हैं भारतीय ,भारत माता की सच्ची संतान।
मां भारती देती सदा ,शिक्षा संस्कार, मानवता का वरदान।
भारत माता अभिनंदन दिवस मनाएं ,करें भारत माता का गुणगान ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है ।






