माँ तू होती तो

Date:

आज किसी तस्वीर में देखा,

एक नन्हा-सा चेहरा था,

आँखों में जैसे प्रश्न कई थे,

होठों पर बस सन्नाटा था।

 

कमरे में वह चुप बैठी थी,

भूख लिए दिन ढलता था,

मैला चेहरा देख लगा यूँ,

जैसे बचपन भी रोता था।

 

न जाने कितनी देर से उसने,

माँ को शायद पुकारा होगा,

एक निवाला पाने खातिर,

कितनी बार निहारा होगा।

 

तस्वीर देख न जाने क्यों फिर,

मेरा मन भर आया माँ,

उस नन्ही-सी बच्ची में मैंने,

तुझको फिर से पाया माँ।

 

माँ, तू होती तो शायद,

मुझको यूँ भूखा न रहने देती,

मेरी आँखों की नमी पढ़कर,

बिन पूछे ही सब कह देती।

 

प्यास लगी हो, कैसे जानती,

भूख लगी हो, समझ जाती,

मेरे चेहरे की छोटी-सी,

शिकन भी तुझसे छिप न पाती।

 

आज भरी है दुनिया सारी,

फिर भी मन सूना-सूना है,

तेरे बिन माँ इस जीवन में,

क्या सचमुच कुछ भी अपना है?

 

तेरे हाथों की वह रोटी,

आज बहुत याद आती है,

थाली छोटी होती थी पर,

ममता उसमें भर जाती थी।

 

कभी डाँट में प्यार छिपा था,

कभी दुलार में मीठी बात,

मेरी खातिर जागा करती,

माँ! तू कितनी-कितनी रात।

 

आज न जाने कितने बच्चे,

ममता से महरूम हुए हैं,

कितने नन्हे हाथों के सपने,

भूख में ही मजबूर हुए हैं।

 

हे माँ! जहाँ कहीं भी होगी,

अपने बेटे की बात सुनना,

जिस बच्ची को देखा मैंने,

उसके सिर पर हाथ धरना।

 

उसके सूने नयन हँसा देना,

उसके अधरों पर मुस्कान,

कोई माँ बनकर आ जाए,

भर दे उसका सूना जहान।

 

मैं तुझको हर रोज़ पुकारूँ,

तू सुनती होगी न माँ?

दूर गगन के उस पार कहीं,

रहती होगी न माँ?

 

माँ, मैं आज भी बच्चा हूँ,

तेरी यादों में खो जाता हूँ,

दुनिया चाहे बड़ा कहे पर,

तेरे आगे रो जाता हूँ।

 

तू होती तो पूछती मुझसे,

“बेटा! खाना खाया या नहीं?”

अब यह पूछने वाला कोई,

मेरे घर में बचा नहीं।

 

एक तस्वीर ने आज मुझे फिर,

तेरी याद दिला दी माँ,

उस नन्ही बच्ची की आँखों ने,

मुझसे तेरा पता पूछा माँ।

 

माँ, जहाँ भी हो, खुश रहना,

तेरा बेटा तुझसे प्यार करे।

तेरी ममता की छाँव सदा ही,

हर भूखे बच्चे का संसार करे।

 

जिस घर में कोई बच्चा रोए,

वहाँ दया का दीप जले,

जिस थाली में भोजन कम हो,

उसमें ममता बनकर पलें।

 

किसी नन्ही आँख में आँसू,

अब यूँ ही न ठहरने पाएँ,

माँ की ममता से वंचित बच्चे,

माँ जैसी छाया फिर पाएँ।

 

तू नहीं है फिर भी माँ,

तेरी ममता मेरे साथ है,

हर भूखे बच्चे की पीड़ा में,

आज भी तेरा हाथ है।

 

माँ, तेरे चरणों में अर्पित,

मेरी आँखों की यह धार।

तू जहाँ रहे, बस खुश रहना,

माँ! तुझसे है मेरा संसार।

 

दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’

चन्दौसी जनपद संभल

Previous article
Next article

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

लेटेस्ट खबरें

गांव-समाज की खबरें
Related

सत्संग में मानव जीवन के महत्व और आत्मिक साधना का संदेश,विधायक रमाशंकर सिंह पटेल ने लिया सहभाग

मीरजापुर(राजगढ़)। ग्राम गोल्हनपुर, मंडल सतेशगढ़, विकासखंड राजगढ़, विधानसभा मड़िहान...

गांधी- शास्त्री जयंती छात्रों ने भाषण और देशभक्ति गीत गाकर श्रद्धांजलि दी, प्रबंधक और प्रधानाचार्य ने दिए संदेश

मीरजापुर(राजगढ़)।विकास खंड राजगढ़ अंतर्गत ग्राम सभा दरवान अंतर्गत रूद्रा...

वडनगर से बनारस सेवा संकल्प यात्रा का महोली में भव्य स्वागत, जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा

     विधायक शशांक त्रिवेदी और भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला की...

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध-दिवस

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध-दिवस प्रति वर्ष साल 1 अक्टूबर को मनाया...