।।रचना शीर्षक।।
।।मेरी जान हिंदी मेरा अभिमान हिंदी।
।।विधा।।सजल।।
मेरी जान हिंदी,मेराअभिमान हिंदी।
हम सब की एक पहचान हिंदी।।
हिंदी में बसते प्राण हम सबके।
हम सब का एक नाम हिंदी।।
वेद शास्त्र पुराण संस्कारऔर संस्कृति।
एक अथाह सागर ज्ञान है हिन्दी।।
सबकी बोली सबकी भाषा मन भाए।
कितना कहें बहुत महान है हिंदी।।
प्रेम की भाषा प्यार की बोली।
घृणा और नफरत से अनजान हिंदी।।
पुरातन काल के अविष्कारों का गौरव।
पूर्ण तकनीकी ज्ञान विज्ञान है हिंदी।।
संस्कृत भाषा से जन्मी हिंदी भाषा।
ऋषि मुनियों का गहन विधान हिंदी।।
वसुधैव कुटुम्बकम का भाव है निहित।
जानो ऐसा एक परिधान है हिंदी।।
विश्व एकता शांति की अग्रदूत भाषा।
अमन चैन संदेश का अभियान हिंदी।।
हर धर्म जाति भाषा जोड़ने वाली।
यों समझो हंस पूरा हिंदुस्तान हिंदी।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।
©. @. skkapoor
सर्वाधिकार सुरक्षित






