श्री कृष्ण,श्री कृष्ण हरे मुरारे!
हे नाथ नारायण वासुदेवा!
कानन कुण्डल मकराध्वज राजे,
कांधे पीताम्बर अद्भुत साजे,
शीश मुकुट संग मोरपखा है,
गल बैजन्ती माला डोलत,
अधरान मधुर मुरलिया बाजे।
श्री कृष्ण,श्री कृष्ण हरे मुरारे!
हे नाथ नारायण वासुदेवा!
कमर करधनिया छवि पावत,
रुनझुन पांव पैजनिया बाजत,
मंद मुस्कान सबै उर रीझत,
शोभा सलिल न जात है बरनत,
श्री कृष्ण,श्री कृष्ण हरे मुरारे!
हे नाथ नारायण वासुदेवा!
बाल ग्वाल संग बलराम सुहावत,
लकुट कमरिया,गोधन तीर दुपहरिया बीते,
सांझ परत घर आवत लाला,
अँखियां हरिदर्शन को प्यासीं।
श्री कृष्ण,श्री कृष्ण हरे मुरारे!
हे नाथ नारायण वासुदेवा!
यमुना किनारे,भोग लगावे कन्हैया!
निरखि-निरखि चित्त सों हुए बेहाल,
ज्यों नदिया रहे हरदम प्यासी।
श्री कृष्ण,श्री कृष्ण हरे मुरारे!
हे नाथ नारायण वासुदेवा!
भूख,प्यास औ नींद गई सब,
सुषमा बन गई हरि की दासी।
जपत निरन्तर नाम है तेरो,
भजत रहे जो,वो तेरो ही होले।
श्री कृष्ण,श्री कृष्ण हरे मुरारे!
हे नाथ नारायण वासुदेवा!
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक भाव, सद्यः निःसृत,©®
रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर,उत्तराखंड।






