अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस

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21 सितंबर को , हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाते ।

विश्व में हो शांति ,संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेश को अपनाते।

जाति -धर्म -भाषा- प्रांत- देश संबंधी भेद ,मिटाकर शांति गीत गाते।

वर्तमान में रूस- यूक्रेन देश एवं अमेरिका -ईरान युद्ध चल रहे , अशांति के बादल मंडराते।

जनमानस पटल पर ,चिंता के बादल छा जाते।

युद्ध न हो ,गौतम बुद्ध के सत्य- अहिंसा सिद्धांत को ,देश क्यों नहीं अपनाते ।

क्रुद्ध होकर युद्ध की विभीषिका, ये देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले आते।

वैश्विक व्यापार -क्षेत्र विस्तार की महत्वाकांक्षाएं लेकर, देश अशांति मचाते ।

सब अपनी -अपनी मर्यादा में रहे, शांति के क्षण सबको है भाते।

शांति -शकुन से बड़ा कोई सुख नहीं, देश समझ नहीं पाते ।

कुछ देशों की लड़ाई में, निर्दोष देश भी अनेक कष्ट उठाते ।

वसुधैव कुटुंबकम, भाव से विश्व में खुशियों के फूल मुस्काते।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर ,हम मानवीय भावनाएं जगाते।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ,शांति के प्रयास ही प्रगति लाते।

परमाणु बम ,हिरोशिमा -नागासाकी का करुण दृश्य रचाते ।

मानवता के माथे पर ,भद्दा कलंक लगाते ।

क्रूरता दिखाते, विश्व में अशांति मचाते।

शांति के लिए कदम बढ़ाए ,सनातन धर्म का हम संदेश सुनाते।

आतंकवाद को मिटाए ,शांति लाए, विश्व में युद्ध से सब कतराते।

अंतरराष्ट्रीय विश्व शांति दिवस, मानवता के हित में देश मनाते।

रचयिता

डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश

रचना मलिक स्वरचित है।

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