सफलता वरदान नहीं
सफलता आसान नहीं
चुनौतियों संघर्षो कि शान!!
आशा और निराशा मध्य
भय अंधकार उद्देश्य पथ
कभी भयंकर झाँझावत
तूफान!
हिचकोले खाती कभी
नव चेतना विश्वास का
पथ दर्शाती कभी
सफलता का यथार्थ!!
सफलता क़ो पल प्रहर
मीलती चुनौती आंख
गड़ाए एक टक निहारते
रहते प्रतिस्पर्थी जैसे शेर
बाज!!
सफलता का प्रथम
सिद्धान्त उद्देश्य प्राप्ति से
पूर्व भनक ना लगे
किसी क़ो कानो कान!!
सफलता का दूसरा
अहम पढ़ाव नियोजित
सायमित पग पथ दृढता
प्रमाण!!
सफलता महत्वपूर्ण
ठहराव भय भ्रम से
विलगाव!!
उद्देश्य पथ से दृष्टि
दिशा विचलित ना हो
जैसे अर्जुन और चिड़िये
कि आंख!!
सफलता अहम अस्तित्व
शिखर पर स्थापित हो पुनः
फिसल ना जाए बटेर
हाथ का मुहावरा हो
चरितार्थ!!
युग का प्राणी प्रत्येक का
उद्देश्य पथ, जीवन प्रत्येक
चाहता शिखर सफलता का
गान!!
चाहत प्राणी कि स्थापित हो
युग श्रेष्ठ पुरुष पराक्रम जैसा
कुछ भी कर गुजरने क़ो तैयार!!
विकट यह स्थिति
प्रतियोगिता सफलता कि
विकराल काल समय कि
जैसे आग!!
सफलता का पथ अग्नि
पथ जैसा चाहे बनाना पड़े
शवो कि सीढ़ी नहीं एतराज!!
युग, समाज राजनीती
शिक्षा,परीक्षा संस्था
संस्थान हर जगह व्यक्ति
चाहता सफलता का
सोपान!!
सफलता तो धैर्य का
आभूषण चमत्कार
सफलता दृढ़ता का
मान,!!
सफलता सौम्य विनम्र
व्यवहार,सफलता का
निर्धारण करता स्वंय
सम्ययोचित न्यायोचित
क्षमता दक्षता पराक्रम
अनुसार!!
सफलता किसी थाती नहीं
ना हीं जन्म सिद्ध अधिकार
सफलता अनुवाशिक नहीं
सफलता कर्म मर्म धर्म का
युग चिंतन सत्कार!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!






