हर मोड़ पर जो थाम ले, विश्वास की तरह।
वो शख़्स है धूप में भी, छाँव की तरह।
दुनिया साथ छोड़ दे, हालात के डर से।
वो साथ चले उम्र भर, पांव की तरह।
मेरी हँसी में जो खुशी, अपनी ढूँढ ले।
मेरी उदासी में दुखे, घाव की तरह।
दुनियां बदल जाए तो, कोई ग़म नहीं।
वो साथ रहे,साथ मेरे, छांव की तरह।
बंदिशे किसी की उसे, रोक ना पाई।
वो चलता रहा साथ मेरे, सांस की तरह।
अपने तो बहुत मिलते है ,जीवन के डगर में।
एक वो ही मिला है मुझे, आस की तरह।
तूफान भी आए तो, टकरा के, गुजर जाए।
बनके ढाल सामने मिले, चट्टान की तरह।
बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश
गोरखपुर






