विधा : बाल कविता
आओ साथियों, खेलें खेल,
छुक-छुक करती आई रेल।
बड़ी जोर से सीटी बजाती,
सबको अपनी ओर बुलाती।
लाल-हरी झंडी जब लहराए,
रेल हमारी आगे जाए।
डिब्बे सारे खूब सजाए,
बच्चे मिलकर गीत सुनाएँ।
कोई बोले—मैं इंजन हूँ,
कोई बोले—मैं चालक हूँ।
हँसते-गाते चलाएँ रेल,
मिलकर खेलें प्यारा खेल।
छुक-छुक करती रेल हमारी,
सब बच्चों को लगती प्यारी।
सीख यही यह हमें सिखाए,
मिल-जुलकर हम आगे जाएँ
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश






