
दि ग्राम टुडे,कानपुर। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) की लाभार्थी महिलाओं के लिए ‘बेडसाइड बैंक खाता खोलने’ की अभिनव पहल का शुभारंभ किया। इस व्यवस्था के तहत अब पात्र महिलाओं के बैंक खाते अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही उनके बेडसाइड पर खोले जाएंगे, जिससे उन्हें बैंक शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और योजना की प्रोत्साहन राशि सहित अन्य सरकारी लाभ सीधे उनके खातों में समयबद्ध एवं सुरक्षित रूप से प्राप्त होंगे।
कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने एसबीआई की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए इसे डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे गरीब एवं जरूरतमंद माताओं को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल तरीके से मिलेगा तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी बनेंगी।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कानपुर नगर ने कहा कि अस्पताल में ही बैंक खाता खोलने की सुविधा से लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा तथा जननी सुरक्षा योजना का लाभ सीधे और समय पर महिलाओं तक पहुंच सकेगा। उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण बताया।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी एवं सीएमएस डॉ. अनीता गौतम ने इस पहल के लिए एसबीआई के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह मॉडल भविष्य में अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा एसबीआई के संयुक्त तत्वावधान में “वित्तीय साक्षरता एवं वित्तीय समावेशन” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी महिलाओं, उनके परिजनों तथा स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षित बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान प्रणाली और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान विभाग के लगभग 400 कर्मचारियों पर किए गए एक सर्वेक्षण के निष्कर्ष भी साझा किए गए। सर्वेक्षण में सामने आया कि लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारी किसी न किसी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं। वहीं 95 प्रतिशत कर्मचारियों को सरकारी बैंकिंग योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं थी तथा लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारियों को साइबर धोखाधड़ी होने पर शिकायत दर्ज कराने और तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी नहीं थी।
एसबीआई के हिमांशु सिंह ने बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया, जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम, आधार आधारित बैंकिंग सेवाएं, बीमा एवं पेंशन योजनाओं सहित विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से बचाव, ओटीपी साझा न करने तथा सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के उपायों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वित्तीय साक्षरता प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है। बैंकिंग सेवाओं की सही जानकारी से न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलता है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और वित्तीय सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. फरहीन, डॉ. मीनाक्षी एवं डॉ. उमंग ने किया। कार्यक्रम में एसबीआई के क्षेत्रीय प्रमुख संजय चौधरी, शाखा प्रबंधक सिम्मी साहू, हिमांशु सिंह, जितेंद्र शुक्ल, विनीता रावत, अमरेंद्र सिंह, प्रशांत सिंह सहित विभाग के चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, पैरामेडिकल स्टाफ, जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी महिलाएं तथा एसबीआई के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।






