सीएसए के 28वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का बड़ा संदेश, एक माह में दूर हों विश्वविद्यालय की सभी कमियां, 649 उपाधियां और 63 पदक वितरित

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दि ग्राम टुडे, संजय मौर्य यूपी हेड।
कानपुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर का 28वां दीक्षांत समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। समारोह में 649 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां तथा 63 मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक प्रदान किए गए।


इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक माह के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए और कहा कि वह स्वयं इसकी समीक्षा एवं निरीक्षण करेंगी।
समारोह में जनपद फर्रुखाबाद के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं तथा पुलिस लाइन में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया। राज्यपाल ने प्रदेश में अब तक 64,443 आंगनबाड़ी किट वितरित किए जाने की जानकारी देते हुए निर्देश दिए कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तक शत-प्रतिशत किट पहुंचाई जाएं और एचपीवी टीकाकरण अभियान भी पूरी तरह सफल बनाया जाए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों में निबंध, भाषण, प्रश्नोत्तरी एवं अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
दीक्षांत समारोह में पदकों के वितरण की समीक्षा के दौरान राज्यपाल ने विभिन्न परिसरों में पदकों की संख्या कम होने पर नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों से इसका कारण पूछा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को मेधावी विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को डिजिलॉकर के माध्यम से अंकतालिका एवं उपाधि डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करने और उन्हें प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और विद्यार्थियों को घर बैठे ही अपने शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे।


उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण कर पाई गई कमियों पर भी असंतोष व्यक्त किया। विशेष रूप से महिला छात्रावासों की अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर करने, जर्जर भवनों की मरम्मत कराने, नई लाइब्रेरी को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बनाने तथा निर्माणाधीन छात्रावासों को सुरक्षित एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त विकसित करने के निर्देश दिए। सभी छात्रावासों में स्वच्छता, पौष्टिक भोजन, वॉशिंग मशीन तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की गौशाला में बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने, कर्मचारियों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने, खेल मैदानों का विकास करने तथा एक्सपायर हो चुके अग्निशमन उपकरणों को तत्काल बदलने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर की नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए कुलपति, शिक्षकों और कर्मचारियों की समितियां गठित करने को भी कहा।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसानों में। उन्होंने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण और डेटा आधारित कृषि प्रबंधन को भविष्य की आवश्यकता बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों और नवाचारों को खेतों तक पहुंचाकर किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि आज कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एग्री-स्टार्टअप, ड्रोन सेवाएं, स्मार्ट सिंचाई, कृषि ई-कॉमर्स, फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों के शोध, विश्वविद्यालयों के ज्ञान और किसानों के अनुभव के समन्वय से कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।


राज्यपाल ने प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा उत्पादित गुणवत्तापूर्ण बीजों को प्राथमिकता से खरीदकर किसानों तक पहुंचाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को बीज उत्पादन का लक्ष्य देने के बाद उनकी खरीद भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विश्वविद्यालयों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े और किसानों को प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने हाल ही में शुरू की गई ‘प्रगति योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी बनाया जाएगा, जो आधुनिक तकनीक, मृदा परीक्षण, कृषि यंत्र, वित्तीय परामर्श और विपणन जैसी सेवाएं किसानों तक पहुंचाएंगे।
समारोह में राज्यपाल ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों सहित 13 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र, पुस्तक, पेन और बैग प्रदान कर सम्मानित किया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री को स्मृति चिह्न एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया, जबकि एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को पुस्तक भेंट की गई। जिला प्रशासन को भी पांच पुस्तकें प्रदान की गईं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजीव गुप्ता ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। समारोह में मुख्य अतिथि बिम्सटेक के महासचिव एवं वरिष्ठ राजनयिक राजदूत इंद्र मणि पांडे, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षक, वैज्ञानिक, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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