रिद्ध – सिद्ध पूरे करें , सांसारिक सब काम।।
होय न संकट काम में , करती तुम्हें प्रणाम।।
प्रथम काम आरंभ में , करती बप्पा याद।
सफल करें तब कार्य प्रभु , विघ्न न आते बाद।।
करता वंदन जग तुम्हें , हो तुम दया निधान ।
करते भव- बाधा हरण , भक्तों की तुम जान।।
सच्चे मन से आपको , सभी नवाते शीश।
इच्छा करते पूर्ण हैं , भक्त-जनों की, ईश।।
गणपति बप्पा मोरया , गूँजा है चहुँ ओर ।
जयकारों के बोल से , सभी दिशा में शोर।।
नाँचे -गाते हैं सभी , प्रभु गणेश को लाय ।
मेले सम-आगम लगे , आस्था मन दुलराय।।
शरणागत जो आपके , देते उनका साथ ।
सुन के दिल की बात तुम ,सिर पर रखते हाथ।।
सदा करूँ स्तुति आपकी , घट-घट में हो वास ।
जीवन के आधार बन , करना जगत निवास।।
यथा शक्ति पूजें तुम्हें , रखें चौथ उपवास।
काम सिद्ध करते सकल , आकर जन के पास।।
दूर करो आतंक सब , रहे जगत में शांति ।
हृदय होय निर्मल सभी , करो प्रेम जन क्रांति।।
होय मान – अपमान जब , सदा रहें सम- भाव ।
रखे न मन में क्रोध को , पहन न द्वेष- नकाब।।
जो पूजा गणपति करें , पाते प्रभु -आशीष ।
मिलता सुख- संपत्ति सब , वंदन करते ईश।।
नाना रूपी वर्ण में , विराजते जग- भाल ।
मुकुट माथ पर हैं धरे , लंबोदर है, लाल ।।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी, नवी मुंबई






