द्वितीय अंतरराष्ट्रीय दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ मंच से सूर्योदय फिल्म प्रोडक्शन की फिल्म भले दिनों की बात के पोस्टर एवं गीतों का लोकार्पण

Date:

हरिद्वार। दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय दो दिवसीय दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ में संस्कृति, साहित्य, सनातन चेतना, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। महोत्सव के दोनों दिवस विभिन्न सत्रों में देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों, संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं एवं कला-जगत से जुड़े लोगों ने सहभागिता की।
महोत्सव के द्वितीय दिन सूर्योदय फिल्म प्रोडक्शन, बिलासपुर की आगामी फिल्म भले दिनों की बात के पोस्टर एवं गीतों का भी भव्य लोकार्पण मंच से किया गया। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता निर्देशक डाॅ.सुनील दत्त मिश्रा ने फिल्म की रचनात्मक यात्रा और उसके सामाजिक सांस्कृतिक संदेश पर प्रकाश डाला।
सूर्योदया फिल्म प्रोडक्शन, बिलासपुर की ओर से प्रोपराइटर डॉ. सुनील दत्त मिश्रा, फिल्म अभिनेता, लेखक, प्रोड्यूसर, निर्देशक एवं गीतकार ने दिव्य गंगा सेवा मिशन के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।
दिव्य गंगा सेवा मिशन की ओर से डॉ. सुनील दत्त मिश्रा को ‘गंगा सेवी सम्मान’ एवं ‘टीजीटी साहित्य भूषण सम्मान’ प्रदान किया गया। उन्हें माँ गंगा का चित्र और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
महोत्सव के प्रथम दिवस मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक रहे। अति विशिष्ट अतिथि प्रो. शिशिर पाण्डेय, कुलपति, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट, तथा लोकपाल वर्मा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश, उच्च न्यायालय उत्तराखंड रहे। विशिष्ट अतिथियों में स्वामी आशुतोष जी महाराज, मोटिवेशनल स्पीकर तथा डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, पार्षद, शंकराचार्य परिषद शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विद्या शंकर चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त मुख्य शिक्षा अधिकारी, उत्तराखंड ने की।
प्रथम दिवस के कार्यक्रमों का संचालन मनीष कुमार, मनीषा आवले चौगांवकर एवं जयप्रकाश उपाध्याय ने किया। इस दिन उद्घाटन सत्र के साथ नेपाली चारु विधा पर देवी पंथी के नेतृत्व में विशेष कार्यक्रम, ‘माँ गंगा एवं सनातन संस्कृति’ विषय पर विमर्श, शोध-पत्र वाचन तथा भव्य कवि सम्मेलन आयोजित हुआ।
द्वितीय दिवस में बौद्धिक विमर्श और सम्मान समारोह
द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि स्वामी आनन्दस्वरूप महाराज, शाम्शवी पीठाधीश्वर, संस्थापक शंकराचार्य परिषद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष काली सेना रहे। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, पार्षद शंकराचार्य परिषद तथा आचार्य धर्मेन्द्र तिवारी, पूर्व कुलपति, आरा विश्वविद्यालय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रमुख आचार्यकुल रहे।
विशिष्ट अतिथियों में प्रकाश काला, शिक्षाविद, रजनीश सिंह, एचओडी शिक्षा विभाग एवं एमओयू प्रभारी, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट, अशोक शुक्ला, उद्योग जगत तथा रश्मि चौधरी, वरिष्ठ भाजपा नेत्री उपस्थित रहीं।
द्वितीय दिवस में बौद्धिक सत्र, सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन सहित कुल छह सत्रों में विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का संचालन मनीष श्रीवास्तव, मनीषा आवले चौगांवकर, जयप्रकाश उपाध्याय, डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’, कुँ. प्रवल प्रताप सिंह ‘प्रवल’ एवं रमेश द्विवेदी ने किया।
महोत्सव के सफल आयोजन में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में केशव पाण्डेय—राष्ट्रीय संयोजक, आचार्य धीरज द्विवेदी याज्ञिक—राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, विनय पाण्डेय—राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पवन कुमार सिंह—राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, मंजुल चतुर्वेदी—राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, शालिनी रस्तोगी—राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ, हिमांशु प्रजापति—राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ, पूनम धस्माना—राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ, डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय—राष्ट्रीय समन्वयक एवं कार्यक्रम प्रभारी तथा इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’—प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सहित अनेक पदाधिकारियों ने सक्रिय योगदान दिया।
दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ ने गंगा संरक्षण, सनातन संस्कृति, साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण और भारतीय ज्ञान परंपरा को एक साझा मंच प्रदान करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की। महोत्सव में साहित्य और संस्कृति के साथ फिल्म एवं कला जगत की सहभागिता ने आयोजन को और व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

लेटेस्ट खबरें

गांव-समाज की खबरें
Related

अधूरी ख़्वाहिशों का उजाला

ज़िंदगी को हमेशा मुक़म्मल होने की ज़िद नहीं होती,कभी-कभी...

कुछ नालायक बेटों ने

कुछ नालायक बेटों ने बाप को विवश कर रखा है   कमाने...

ग़ज़ल 

मुझसे ज़मीर बेच के खाया नहीं गया। मज़बूर को कभी...

स्वाभिमानी स्त्री

लोगों ने मुझे तोड़ने की, हद से ज्यादा कोशिशें की। मैं...