दिया निमंत्रण गणेश जी वंदनवार सजाऊँ।
घर ऑंगन में बैठक डालू मुतियन चौक पुराऊॅं।।
भादों चतुर्थी जन्म गणेश जी का
प्रथम देव वह कहलाये।
पूजा अर्चना करती में तो।
हरदम शीश नवाऊॅं।।
वीर हमारे गणपति देवा
माथे तिलक लगाऊं।
मोदक अति प्रिय गणपति
रुचि -रुच भोग लगाऊँ।।
माँ गौरा के पुत्र कहाये।
जग की रक्षा करते।
रिद्धि- सिद्धि को साथ ले आये।
खुशियाँ घर में भर लाये।।
शुभ लाभ को द्वार बिठाकर।
हर घर आकर बैठे।
कार्य सिद्ध करते प्रथम निमंत्रण देते।
प्रथम पूज्य ही रहते।।
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डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश
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