।।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 157 वीं जयंती तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की भी जयंती 02=10=2026 पर उनको समर्पित एक रचना।।
।।विधा।।मुक्तक।।
*।1।*
अहिंसा का मार्ग,दिल में स्वराज,
करोडों का यही आगाज़ था।
पराधीनता सपनेहुँ सुख नहीं बस,
स्वाधीनता का ही ख्वाब था।।
सत्याग्रह,आंदोलन और अनशन,
टिक न पाए थे गोरे अंग्रेज़।
इसलिए सन सैंतालीस को हुआ,
अपना भारत देश आज़ाद था।।
*।2।*
बापू के अहिंसा मंत्र से ही हुआ,
आजादी का यह उजियारा है।
महात्मा गांधी प्रयत्नों से ही बना,
भारत एक स्वच्छ किनारा है।।
हमसब ही लोग राष्ट्रपति को पूजते,
पर न करते उनका अनुसरण।
अहिंसा के इस पुजारी की बात को,
आज की हिंसा ने नकारा है।।
*।।3।।*
जय जवान जय किसान का देकर,
नारा शास्त्री जी हुए थे अमर।
सादगी और दृढ़ता से बनी थी इस,
प्रधानमंत्री की हर डगर।।
नीचे जमीन से ऊपर उठकर किया,
था भारत महान नाम रोशन।
उनकी जयंती पर हो रही है हररचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।©. @. skkapoor
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(गांधी जी एवम शास्त्री जी की जयंती की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत।)






