मिट्टी के खिलौने
रंग भरे सलोने
बचपन की आई याद,
पशु पक्षी, गुड्डे-गुड़ियां
मिट्टी से ही बनती थी सब्जियों की सलाद।
मिट्टी के खिलौनों से घर था आबाद।
कभी जो टूट जाते थे
तो दुखी हो जाते थे।
नन्ही नन्ही चिड़ियों से,
घर हम सजाते थे।
पैलमेट के ऊपर रखे हुए
वह खिलौने सबको लुभाते थे।
गुड्डू जब खिलौने से खाता था मिट्टी,
तो पापा से पिटवाते थे।
हर घर में मिट्टी के खिलौने
अमीर गरीब का भेद मिटाते थे।
दिखावे के इस युग में
कौन मिट्टी में खेलता है?
खिलौनो को देखकर ही तो
अंदाज़ हैसियत का लगता है।
मोबाइल ने अबसब छीन लिया,
अब खेलने के लिए खिलौने की बच्चों को जरूरत ही है कहां?
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा






