राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 119 वीं जन्म जयंती पर नमन ।
सूर्य- भास्कर -से थे कवि दिनकर जी, प्रकाशित किया ओज से हिंदी साहित्य गगन।
23 सितंबर 1908 को जन्मे सिमरिया गांव ,जिला बेगूसराय उत्तर प्रदेश ,खिला भारत चमन।
रविसिंह के पुत्र -कवि दिनकर, माता मनरूप देवी के ललन को, कोटि-कोटि नमन।
बचपन में पिता ने किया स्वर्ग लोग गमन, प्रगति पथ पर बढ़े विधवा मां के ललन।
सन् 1928 में मैट्रिक ,1932 में बी.ए.परीक्षा की उत्तीर्ण ,1934 में बने प्रधान अध्यापक ,खिला जीवन सुमन ।
1960 में भागलपुर विश्वविद्यालय के बने कुलपति ,पूर्णिया कॉलेज में ” रश्मिरथी “का किया सृजन।
उनकी कलम बनी तलवार- रणभेरी की हुंकार से गूंजा भारत वतन ।
कृतियां -नील कुसुम ‘काव्य भ्रमर, रेणुका ,हूंकार ,कुरुक्षेत्र, उर्वशी, रश्मिरथी आदि का किया सृजन।
राष्ट्र भक्ति से शक्ति और जोश का उद्घोष किया, गूंज उठा भारतीय जन -जन -मन ।
“परशुराम की प्रतीक्षा में “लिखा- सिंहासन खाली करो जनता आती है “थर्राया अंग्रेज शासन।
“उर्वशी” में श्रृंगार -अनुराग का संगम ,कवि बने वीर रस और श्रृंगार रस के रतन ।
सिंहनांद कर जगाया भारतीय मन, अन्याय- शोषण के विरोध स्वर एवं राष्ट्रभक्ति में थे मगन ।
राष्ट्रपति ने राज्यसभा सदस्य किया मनोनीत, राष्ट्रकवि कहलाए ,गुंजा सदन ।
युग दृष्टा कवि की गौरव गाथा ,युग युग तक गूंजेगी, क्रांति के लिए कलम से किये सौ जतन।
साहित्य पीठ ,पद्मश्री आदि सम्मान पाए, किया उत्कृष्ट सृजन ।
24 अप्रैल 1974 को चेन्नई में हुआ, कवि रामधारी सिंह दिनकर जी का निधन ।
उनकी जन्म जयंती पर अर्पित है श्रद्धा सुमन, कोटि-कोटि नमन।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है।






